नाबालिग को बहला-फुसलाकर उत्तराखंड के देहरादून ले जाने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने दोषी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) दीपचंद पांडेय की अदालत ने दोषी धिरेन्द्र लाल हरिजन पर कुल 1 लाख 72 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा बिहार सरकार के माध्यम से पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
2024 में दर्ज हुआ था मामला
मामला किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ थाना क्षेत्र का है। इस संबंध में कांड संख्या 122/2024 और वाद संख्या 11/25 दर्ज किया गया था। अभियुक्त पर 23 सितंबर 2024 को नाबालिग को बहला-फुसलाकर देहरादून ले जाने और वहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था। मामले में 28 अक्टूबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 30 नवंबर 2024 को आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने 11 अप्रैल 2025 को मामले में संज्ञान लिया और 26 मई 2025 को अभियुक्त के खिलाफ आरोप गठित किए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों का परीक्षण कराया गया। गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को अभियुक्त को दोषी करार दिया था।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी को सश्रम आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है। वहीं, पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) और 127(2) के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। बीएनएस की धारा 126(2) के तहत एक महीने के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
पीड़िता को मिलेगा पांच लाख रुपये मुआवजा
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) मनीष कुमार साह के अनुसार, अदालत ने बिहार सरकार के माध्यम से पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। फैसले के बाद दोषी को मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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