बिहार में विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त हो जाने से सीमांचल क्षेत्र में अभूतपूर्व मुश्किल खड़ा हो गया है। गंगा नदी पर बना यह महत्वपूर्ण पुल भागलपुर और सीमांचल बंगाल असम गुवाहाटी, के बीच सीधी कड़ी था। इसके गिरने से कटिहार, पूर्णिया, कोढ़ा, कुरसेला समेत कई जिलों का भागलपुर से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
इस घटना का सबसे बड़ा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। भागलपुर जाने वाली बसों और अन्य वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। अधिकांश गाड़ियां अब नवगछिया तक ही सीमित रह गई हैं, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में कई बार वाहन बदलना पड़ रहा है। इससे यात्रा समय के साथ खर्च भी बढ़ गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर स्थित कुरसेला के कोसी पुल पर वर्षों बाद वाहनों का दबाव कम देखने को मिल रहा है। जहां पहले दिन-रात ट्रकों और बसों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। कुरसेला बस स्टैंड पर भी यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
सीमांचल के अधिकांश गरीब तबके के मरीज बेहतर इलाज के लिए भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब संपर्क टूटने के कारण गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करने के कारण मरीजों की हालत बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।
शिक्षा पर भी असर
हर दिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भागलपुर के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई के लिए जाते थे, लेकिन अब लंबी दूरी और अतिरिक्त खर्च के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई छात्रों की उपस्थिति में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। वही रोजाना के भातीं भागलपुर से सीमावर्ती जिलों में एवं क्षेत्र में काफी संख्या में सरकारी कर्मी, शिक्षक शिक्षका , बैंकों के कर्मचारी,पदाधिकारी अन्य भागलपुर से सफर करते थे जो अब मुश्किल हो गई है। इसमें कई पदाधिकारी देखे गए कि अपने कार्यक्षेत्र में रहने के लिए मजबूर हो गए।।
रोजगार और व्यापार पर संकट
रोजाना भागलपुर जाकर काम करने वाले हजारों मजदूरों और कर्मचारियों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। वहीं मालवाहक वाहनों की आवाजाही रुकने से बाजारों में फल, सब्जी, अनाज बालू गिट्टी समेत जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इससे कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल की व्यवस्था की जाए, ताकि आवागमन बहाल हो सके। साथ ही सेतु के शीघ्र पुनर्निर्माण की मांग भी तेज हो गई है।
फिलहाल सीमांचल के लोग इस बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं और सरकार के त्वरित कदमों का इंतजार कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर बुनियादी ढांचे की मजबूती और नियमित रखरखाव की आवश्यकता को उजागर करती है।
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