बिहार के कटिहार जिले के कुरसेला, बरारी एवं मानिहारी प्रखंड में गंगा नदी के तीव्र कटाव से उत्पन्न गंभीर संकट को लेकर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल का ध्यान पूर्णिया सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आकृष्ट कराया है। इस संबंध में उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर गंगा तट के स्थायी संरक्षण की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि कुरसेला, बरारी और मानिहारी प्रखंड अंतर्गत दर्जनों गांव गंगा नदी के निरंतर हो रहे कटाव से बुरी तरह प्रभावित हैं। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्र और सार्वजनिक परिसंपत्तियां गंगा में समा चुकी हैं। इससे लगभग 1.20 लाख से 1.50 लाख लोगों का जीवन, आजीविका और आवास गंभीर संकट में पड़ गया है।
कुर्सेला प्रखंड के शाहपुरधर्मी, दक्षिणी मुरादपुर, पूर्वी मुरादपुर, जरलाही, शेरमारी, चाय टोला, कटरिया, सहनी टोला, पत्थर टोला, खेरिया, बालू टोला, मज़दिया, कमलकानी, मधेली सहित दर्जनों गांव गंगा के तट से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इन गांवों की कुल आबादी लगभग 90 हजार से 1.10 लाख के बीच बताई गई है। नदी के प्रवाह में बदलाव और तेज कटाव के कारण खेती योग्य भूमि लगातार नष्ट हो रही है, जिससे सैकड़ों परिवार विस्थापन के कगार पर पहुंच चुके हैं।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र प्रभावी कटाव-निरोधी कार्य नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के कई शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर स्थल तथा वन क्षेत्र भी गंगा में विलीन हो सकते हैं, जिससे व्यापक सामाजिक और आर्थिक त्रासदी उत्पन्न हो सकती है। इसी तरह मानिहारी प्रखंड में कुरसेला से मानिहारी तक गंगा तटवर्ती गांवों में भी कटाव लगातार जारी है, जहां लगभग 30 से 40 हजार की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही है। कटाव के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन, शिक्षा बाधित होना, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में कठिनाई और सामाजिक असुरक्षा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। कई परिवार वर्षों से अपना घर-बार खोकर अस्थायी जीवन जीने को मजबूर हैं, जबकि उनके पुनर्वास की कोई स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि कटिहार जिले के कई गांव गंगा तटीय कटाव से अत्यधिक प्रभावित हैं। बावजूद इसके, कुरसेला से मानिहारी तक गंगा तट संरक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस प्रस्ताव केंद्र प्रायोजितड योजनाओं के तहत प्रस्तुत नहीं हो सका है, जिससे केंद्र स्तर पर कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से मांग की गई है कि कुरसेला, बरारी से मानिहारी तक गंगा के कटाव-प्रवण क्षेत्र का उच्च स्तरीय तकनीकी सर्वेक्षण अविलंब कराया जाए। साथ ही सीमा क्षेत्र कार्यक्रम एवं अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत तट-संरक्षण, तटबंध निर्माण, तट-सुदृढ़ीकरण, स्पर और गाइड बांध जैसे व्यापक कटाव-निरोधी कार्यों को तत्काल स्वीकृति दी जाए।
इसके अलावा गंगा के इस कटाव-प्रभावित क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील घोषित कर केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से दीर्घकालिक कार्य योजना के तहत स्थायी तट-संरक्षण एवं पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि प्रभावित नागरिकों को राहत मिल सके और क्षेत्र की कृषि, आवास एवं जनजीवन की सुरक्षा हो सके।
Post a Comment