टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हवाकोल पंचायत स्थित रेतुआ नदी के खुरखुरिया घाट पर आरसीसी पुल निर्माण की मांग पिछले करीब 75 वर्षों से की जा रही है, लेकिन आज तक इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। पुल के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या खासकर बरसात के मौसम में और भी विकराल हो जाती है, जब रेतुआ नदी उफान पर होती है और लोगों को जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक कार्यों के लिए उन्हें लंबा और जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा दोनों देखने को मिलती है।
जदयू पंचायत अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद मंडल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अब तक कई बार सामूहिक आवेदन जिला पदाधिकारी, सांसद और विधायक को सौंपा गया है, लेकिन आश्वासन के अलावा कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।ग्रामीण महेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि सुखाड़ के समय लोग आपस में चंदा इकट्ठा कर बांस-बल्ले से अस्थायी चचरी पुल का निर्माण करते हैं, ताकि प्रखंड मुख्यालय, जिला मुख्यालय और साप्ताहिक हाट-बाजार तक पहुंच बनाई जा सके। हालांकि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी और असुरक्षित होती है, जो बरसात के मौसम में बह जाती है।स्थानीय ग्रामीण मनोज मंडल, अजय मंडल, अनिल मंडल, चमन लाल मंडल, अनिरुद्ध गिरी, श्यामलाल मंडल सहित अन्य लोगों ने जिला पदाधिकारी विशाल राज एवं राज्य सरकार से अविलंब रेतुआ नदी पर आरसीसी पुल निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी, बच्चों की पढ़ाई सुचारू होगी, मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी।
इस संबंध में कनीय अभियंता जितेंद्र कुमार ने बताया कि पुल निर्माण से संबंधित आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसे वरीय पदाधिकारी को अग्रसारित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगे की प्रक्रिया उच्च स्तर से निर्णय के बाद ही संभव होगी। फिलहाल ग्रामीणों को प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद बनी हुई है।
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