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पूर्व विस् अध्यक्ष सुधांशु बाबू की 115 वी जयंती मनायी गई

धमदाहा से रौशन कुमार की रिपोर्ट

पूर्णिया: बुधवार को मीरगंज बाजार के मुख्य चौराहे पर स्थित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सह साहित्यकार डा0 लक्ष्मी नारायण सुधांशु जी के 115 वीं जयंती मनाया । इस मौक त्रिपुर विजय सिंह उर्फ घिटो सिंह ने सुधांशु बाबू पर प्रकाश डालते हुए कहा सुधांशु बाबू सीमांचल बिहार के गौरव हैं वे समाजशास्त्र, राजनीतिक शास्त्र, हिन्दी, संस्कृत के महान विद्वान थे । उनकी लिखी हुई पुस्तक पूर्णिया कॉलेज यूनिवर्सिटी के छात्र पढ़कर डिग्री हासिल करते हैं । उन्हे पद पाने की कभी चिंता नहीं होती थी बल्कि जो पद उन्हें मिल जाता उसे वे बखूबी निभाते थे । राजनीतिक जीवन मे वे समाज कल्याण राज्यकल्याण के लिए हमेशा समर्पित रहे । जन्मभूमि रूपसपुर चंदवा में उनका डाक बंगला हुआ करता था 


राजनीतिक जीवन मे व्यस्तता के वावजूद वे साहित्यकारों का सम्मेलन व हिन्दी के उत्थान में लगे रहे । वहीं कवि सह साहित्यकार कैलाश बिहारी चौधरी ने प्रकाश डालते हुए कहा कि सुधांशु बाबू राजनीतिक जीवन मे हमेशा हिन्दी वादी बनकर रहे । अंग्रेजी भाषा का हमेशा विरोध किया यही कारण है जब अंग्रेजी बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ तो वे पटना की धरती पर एक हाथ मे अलकतरा की बाल्टी एक हाथ मे कूची लेकर अंग्रेजी में लिखी शब्दो को ढंक दिया । उन्होंने राज्यसभा में सभी को हिन्दी भाषा के प्रयोग के लिए आग्रह किया । एक बार जब उन्हें राज्यपाल ने अंग्रेजी में चिठी भेज आमंत्रित किया तो वे उस चिट्ठी को अस्वीकार कर दिए

उन्हें जब मुख्यमंत्री का ऑफर दिया गया परन्तु वे राजनीतिक जीवन का त्याग कर साहित्य साधना में डूब गए । समाजसेवी मृत्युंजय सिंह एवं वीरव्रत ने कहा सुधांशु बाबू एक महान ख्याति हैं जिनके योगदान से रूपसपुर चंदवा में उच्च विद्यालय का निर्माण हुआ, जिले में पूर्णिया कॉलेज का निर्माण हुआ, साहित्य, कला के विकास के लिए कलाभवन का निर्माण किया ।  उन्होंने सदैव समाज व राज्य को अपना परिवार समझ कर जीने का काम किया यहीं कारण है वे सदैव पूजनीय है ।  आज के इस दौर में ऐसे महान राजनीतिज्ञ का अभाव है । कार्यक्रम में मीरगंज थाना के एएसआई संजय उरांव समेत दर्जनों सहित्यसाधक व समाजसेवियों ने उनके तैलचित्र प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात कविता पाठ किया ।

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