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मौलाना अब्दुल्ला सालिम साहेब की जल्द हो रिहाई:- विधायक अख्तरूल ईमान

मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी साहेब की जल्द रिहाई हो। उक्त बातें विधायक अख्तरूल ईमान ने प्रेस कांफ्रेंस कर कही। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व के एक छेड़छाड़ किया गया विडियो को आधार मानकर इस्लामिक स्कॉलर श्री मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी साहब को युपी एसटीएफ द्वारा अवैध तरीके से गिरफ्तार किया है। तथा इस संबंध में स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचना भी नहीं दिया गया। और ना ही  ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया। बल्कि सीधे दूसरे राज्य में लेकर चला गया। जो कि सरासर न्यायोचित नहीं है। आगे विधायक ने कहा कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के अनुसार श्री मौलाना को यू०पी० पुलिस द्वारा गाड़ी से उतारकर जेल के द्वार तक ले जाने की जो तस्वीर सामने आयी है। उससे स्पष्ट दिखता है कि मौलाना को अत्यंत शारीरिक यातनाएँ दी गयी है। विधायक ने कहा कि माता-पिता का आदर और एक दूसरे के धार्मिक आस्थाओं का सम्मान ना सिर्फ भारतीय धर्मनिरपेक्षता का मूल मंत्र है । बल्कि इस्लाम सहित सभी धर्मो का सिद्धांत है। परंतु किसी धर्मगुरू के साथ यह बर्बरता एवं, अमानवीय व्यवहार मानवाधिकार के विरूद्ध हैं। भारतीय दंड संहिता के अनुसार सजा देना अदालत का दायित्व है ना कि पुलिस का। इस तरह के व्यवहार से वर्दी की निष्पक्षता प्रभावित होती है । और आमजनों का विश्वास पुलिस और प्रशासन से उठ जाता है। जो एक शांत, न्यायोचित एवं सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है। 
विधायक ने आगे कहा कि मौलाना के गिरफ्तारी प्रकरण से सीमांचल सहित पूरे राष्ट्र के मुस्लिमों में काफी नाराजगी एवं रोष व्याप्त है। क्योंकि मौलाना सदैव अपने धार्मिक संबोधनों में धार्मिक सदभाव, प्रेम, भाईचारा की बात किया है। मौलाना सिर्फ इस्लामिक ज्ञान के ज्ञानी नहीं है । बल्कि उनको चारों वेदों का अच्छा ज्ञान भी है। विधायक ने कहा कि बंदुक के नोक पर युपी एसटीएफ का जो गिरफ्तार करने की प्रक्रिया थी । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मौलाना कोई आतंकी हो या राष्ट्र विरोधी कोई कार्य किया हो।
विधायक ने आगे कहा कि जिस वायरल विडियो के मामले में मौलाना कि गिरफ्तारी हुई। उस वायरल विडियो के संबंध में मौलाना साहब ने क्षमा याचना भी किया है। लेकिन फिर भी युपी एसटीएफ द्वारा जिस अवैध तरीके से उनको गिरफ्तार किया गया है । और उनको शारीरिक यातनाएँ दी गयी है । वो कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। विधायक ने आगे कहा कि पहले भी  धार्मिक द्वेष एवं नफरत फैलाने के मामले में और भी कई मामले प्रकाश में आया है।  किंतु जितनी त्वरित कार्रवाई इस मामले में देखा गया । शायद इससे पूर्व कोई ऐसा उदाहरण पहले मिला हो। इस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में हमारे पैगंबर मोहम्मद साहब  के लिए यति नरसिंहानंद एवं नुपुर शर्मा जैसे लोगों ने अभद्र एवं अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। जिससे पूरे राष्ट्र सहित विश्वभर के इस्लामिक अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई । किंतु तब पुलिस द्वारा इतनी तत्परता शायद नहीं दिखाई गयी । जितनी यहाँ दिखायी गयी। इस संबंध में विधायक अख्तरूल ईमान ने मुख्यमंत्री बिहार, गृहमंत्री बिहार, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग पटना, बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग पटना, को लिखित रूप से आवेदन देकर  इस मामले से संबंधित पुलिस पदाधिकारी के विरूद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।

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