पूर्णियां। अमौर विधायक और बिहार विधानसभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति के सभापति अख्तरुल ईमान ने प्रसिद्ध इस्लामिक स्कॉलर मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विधायक ईमान के मुताबिक, यूपी एसटीएफ ने पूर्णिया के दलमालपुर में जिस तरह से कार्रवाई की, वह किसी फिल्मी अपहरण जैसी लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसटीएफ की टीम सादे लिबास में थी और मौलाना को कथित तौर पर बंदूक की नोक पर उठाया गया। इसके अलावा, स्थानीय बिहार पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई और न ही कानूनन आवश्यक 'ट्रांजिट रिमांड' लिया गया। बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी सोशल मीडिया पर वायरल एक विवादित वीडियो के आधार पर हुई है। विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा, "यह वीडियो दो साल पुराना है और इसके साथ छेड़छाड़ की गई है। इस मामले में मौलाना पहले ही सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना कर चुके हैं। इसके बावजूद ऐसी दमनकारी कार्रवाई समझ से परे है।"
विधायक ने इस कार्रवाई को 'चयनात्मक' बताते हुए प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मौलाना चतुर्वेदी की विद्वत्ता का हवाला देते हुए कहा कि वे न केवल इस्लाम के जानकार हैं, बल्कि उन्हें चारों वेदों का भी ज्ञान है और वे सद्भाव के प्रतीक रहे हैं। ईमान ने मौलाना को हिरासत में शारीरिक प्रताड़ना दिए जाने की आशंका भी जताई और कहा कि सजा देने का अधिकार अदालत को है, न कि पुलिस को।अख्तरुल ईमान ने बिहार के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री-सह-गृह मंत्री से मांग की है कि बिहार सरकार तुरंत उत्तर प्रदेश शासन से इस मामले में हस्तक्षेप करे। उन्होंने मौलाना की सुरक्षित और तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा अवैध प्रक्रिया अपनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है। इस घटना के बाद सीमांचल सहित पूरे प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय में भारी रोष है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या बिहार सरकार अपनी पुलिस को दरकिनार कर दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर कोई सख्त रुख अपनाएगी।
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