बारसोई रेलवे स्टेशन पर लगातार लावारिस शराब बरामद होने की घटनाएं कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। लगभग हर मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से यही कहा जाता है कि कोई अज्ञात व्यक्ति शराब छोड़कर फरार हो गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्टेशन परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो शराब छोड़कर जाने वाले लोगों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो पाई?
रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थल पर प्रतिबंधित वस्तुओं का इस तरह मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। सामान्यतः ऐसी किसी भी घटना के बाद संबंधित क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की जानी चाहिए, लेकिन अब तक अधिकतर मामलों में कार्रवाई केवल शराब जब्त करने और उसकी तस्वीर जारी करने तक ही सीमित नजर आती है।
इस मुद्दे पर सिटी हलचल न्यूज़ ने रेलवे अधिकारियों से बात की। अधिकारियों ने बताया कि जिस स्थान पर शराब बरामद होती है, वहां फिलहाल भवन निर्माण कार्य चल रहा है और उस हिस्से में सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि यह जवाब भी कई सवाल छोड़ जाता है। यदि किसी स्थान पर लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो वहां अस्थायी या वैकल्पिक निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
लगातार सामने आ रही बरामदगी की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि स्टेशन के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे, नियमित फुटेज की निगरानी और तकनीकी जांच से ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि हर बार केवल लावारिस शराब बरामद होने की सूचना जारी होती रहे और जिम्मेदार लोगों तक पुलिस या रेलवे प्रशासन नहीं पहुंच पाए, तो इससे तस्करों के हौसले बुलंद हो सकते हैं।
अब आवश्यकता इस बात की है कि रेलवे प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारी बारसोई रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करें, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएं और प्रत्येक बरामदगी के बाद फुटेज की गंभीरता से जांच सुनिश्चित करें, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा भी मजबूत हो।
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